एक बार दो गहरे दोस्तों की आपस मे ही एक विचित्र शर्त लग गई ।
शर्त के मुताबिक उनमें से एक दोस्त ने दूसरे से एक माह एकांत में बिना किसी से मिले या किसी से बातचीत किये एक कमरे में अकेले गुजारने के लिए कहा जिसके लिए उसे 10 लाख नकद वो इनाम देगा । इस बीच, यदि वो शर्त पूरी नहीं करता तो उसे हारा हुआ माना जाएगा।
पहला मित्र ये शर्त स्वीकार कर लेता है । उसे दूर एक खाली मकान में बंद करके रख दिया जाता है । बस दो वक़्त का भोजन और कुछ किताबें उसे दी जाती हैं ।
उसने जब वहां अकेले रहना शुरू किया तो एक दो दिन किताबो से उसका मन बहल गया लेकिन फिर वह परेशान औऱ धीरे धीरे चिड़चिड़ा होने लगा ।
हालांकि उसे बताया गया था कि थोड़ा भी बर्दाश्त से बाहर हो तो वो घण्टी बजा कर संकेत दे सकता है और उसे तुरंत वहां से निकाल लिया जाएगा ।
जैसे जैसे दिन बीतने लगे उसके लिए एक एक पल युगों के समान लगने लगे औऱ अकेले वक़्त गुजारना पीड़ा दायक होने लगी।
वो चीखता, चिल्लाता लेकिन शर्त का खयाल कर बाहर निकलने की कोशिश नहीं करता ।
वो अपने बाल नोचता, रोता, गालियां देता ,तड़प जाता औऱ फ़िर अकेलेपन की पीड़ा उसे भयानक लगने लगी पर वो शर्त को याद कर ख़ुद को रोक लेता ।
कुछ दिन और बीते तो धीरे धीरे उसके भीतर एक अजीब सी खामोशी औऱ गंभीरता परिलक्षित होने लगी।
अब उसे किसी की आवश्यकता का अनुभव नही होता या फिर किसी की कमी नहीं खिलती।
वो बस मौन बैठा रहता। एकदम शांत, उसका चीखना चिल्लाना बंद हो गया।
इधर, उसके दोस्त को चिंता होने लगी कि एक माह के दिन धीरे धीरे बीत रहे हैं पर उसका दोस्त है कि बाहर ही नही आ रहा है ।अब उसे लग रहा था कि वो शर्त हार जाएगा औऱ उसे दस लाख रुपए देने पड़ेंगे।
महीने के अब अंतिम दो दिन शेष थे। इधर उस दोस्त का व्यापार चौपट हो गया , वो दिवालिया हो गया।उसे अब चिंता होने लगी कि यदि उसके मित्र ने शर्त जीत ली तो वो दस लाख रुपए उसे कहाँ से देगा ।
अंत में कोई दूसरा उपाय न देख वो उसे गोली मारने की योजना बनाता है और उसे मारने के लिये जाता है ताकि उसकी मृत्यु के बाद शर्त के पैसे उसे न देने पड़े।
जब वो वहां पहुँचता है तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नही रहा।
वो दोस्त शर्त के एक माह के ठीक एक दिन पहले वहां से चला गया था और एक खत अपने दोस्त के नाम छोड़ गया था ।
खत में लिखा था...........
प्यारे दोस्त इन एक महीनों में मैंने वो चीज पा ली है जिसका कोई मोल नही हो सकता । मैंने अकेले मे रहकर असीम शांति का सुख पा लिया है और मैं ये भी जान चुका हूं कि जितनी जरूरतें हमारी कम होती जाती हैं उतना हमें जीवन में असीम आनंद और शांति मिलती है। मैंने इन दिनों परमात्मा के असीम प्यार को जान लिया है । इसीलिए मैं अपनी ओर से यह शर्त तोड़ रहा हूँ अब मुझे तुम्हारे शर्त के पैसे की कोई जरूरत नही।
जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है अपनी गैरजरूरी इच्छाओं पर नियंत्रण क्योंकि इच्छाओं व अभिलाषाओं का कोई अंत नहीं औऱ इन्हीं के फेरे में पड़ मनुष्य ताउम्र परेशान व बेचैन रहता है...........!!

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