एक बार, एक छोटे से तालाब में, कीचड़ भरे पानी में कुमुद के पत्ते के नीचे, एक छोटा सा झींगुर (Beetle) अपने परिवार के साथ रहता था।
झींगुर परिवार, तालाब में सादा और आरामदायक जीवन व्यतीत कर रहा था।
कभी-कभी, इन झींगुरों के परिवार में उदासी आ जाती थी जब उनका कोई साथी कुमुद के तने पर चढ़ जाता था और फिर कभी वापिस नहीं आता। वे यह समझते थे कि उनका वो दोस्त मर कर हमेशा के लिए उनसे बिछुड़ जाता है।
एक दिन, एक छोटे से झींगुर के मन में एक अजीब सी इच्छा जागृत हुई।अपने दिल की इच्छा को सुनते हुए, उसने उस तने पर चढ़ने की ठानी।
उसने यह निश्चय किया कि वह हमेशा के लिए अपने परिवार को नहीं छोड़ेंगा। वह वापस आएगा और अपने साथियों को बताएगा कि उसे ऊपर क्या मिला?
जब वह तने के सहारे, पानी की सतह के ऊपर कुमुद के पत्ते पर पहुंचा तो वह बहुत थक गया, सूरज की तेज गर्मी में उसे झपकी आ गई। जैसे ही वह सोया,उसका शरीर बदल गया और जब वह उठा, तो वह एक सुंदर नीली पूंछ वाले ड्रैगनपक्षी (Dragonfly) में बदल गया था। उसके पतले शरीर पर उड़ने के लिए चौड़े पंख थे।
उसने खुशी से एक लंबी उड़ान भरी!
हमारे जीवन में भी जब हमें विकास (evolution) की एक अदम्य चाह होती है, तो प्रकृति हमें एक दिव्य मानव बनने की यात्रा की ओर अग्रेषित करती है।
हम अपनी कहानी पर वापस आते है; जैसे ही ड्रैगन पक्षी ऊपर उड़ा, उसने एक नई सुंदर दुनिया देखी, एक बेहतर नए नजरिये से, जिसे वह कभी नहीं जानता था। तब उसे अपने साथियों की याद आई कि वे तो उसे मरा हुआ समझ चुके होंगे।
वह उन्हें यह बताने और समझाने के लिए वापस जाना चाहता था कि वह अब पहले से कहीं अधिक जीवंत है और उसका जीवन समाप्त होने के बजाय परिपूर्ण हो गया है। लेकिन उस नए शरीर के साथ अब वो अपने साथियों को यह खुशखबरी सुनाने पानी में नीचे नहीं जा सकता था।
सीख १: हम वापस वहाँ नहीं जा सकते जहाँ से हम उन्नत होकर आए हैं।
सीख २: किसी तरह अगर हम वापस वहां चले भी जाते हैं तो वे लोग हमें हमारे नए रूप में पहचान नहीं पाएंगे।
तब वह समझा कि जब उसके साथियों का समय आएगा, तब वे भी ये सब जान पाएंगे जो वो अब जान पाया है।
सीख ३: यदि हम अपने चारों ओर के आराम क्षेत्र को नहीं छोड़ेंगे तो हम भी छोटे से झींगुर से विशालकाय ड्रेगन पक्षी नहीं बन पाएंगे।
मनुष्य में भी विकसित होने की असीम क्षमता है, यह एक लंबी सतत प्रक्रिया है, और यह परिवर्तन किसी जादू से कम नहीं है। लेकिन क्या हम अपना कंफर्ट जोन, आराम क्षेत्र, छोड़ने को तैयार हैं?
ड्रैगनपक्षी ने अपने पंख उठाए और अपने आनंदमय नए जीवन में उड़ गया। हालांकि वह नीचे अपने दोस्तों को उनकी क्षमता का अहसास कराकर उन्हें प्रेरित करना चाहता था, और इसलिए वह हर समय उस छोटे तालाब के ऊपर ही मंडराता रहता था । इस उम्मीद में कि एक दिन आएगा जब उनमें से कोई अपने दिल की सुनकर अपना आराम क्षेत्र को छोड़ेगा और एक खुशहाल नए जीवन में उड़ान भरने के लिए आगे बढ़ेगा!
इसी तरह सद्गुरु भी हमेशा प्रेरणा के जीवंत उदाहरण के रूप में हमेशा हमारे साथ रहते हैं। वे उस ड्रैगन पक्षी की तरह हैं जो हमें हमारे दिल की सुनने के लिए मार्गदर्शन करते है।
सीख ४: ऐसा प्रेरणास्पद जीवन जिएं ताकि आपके आसपास के लोग उन्नति के लिए प्रेरित हों।
प्रकृति हमें हमेशा सुंदर तरीके से, उन्नति करने को प्रेरित करती है। बस जरूरत है उसे महसूस करने की!
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें