भयंकर शीत की एक शाम वृक्ष 🌳पर बैठे हंस ने नीचे देखा - एक मुसलक नामक चूहे🐀 का परिवार ठंड में बुरी तरह ठिठुर रहा है, उनके बिलों में पानी भर गया था।
हंस को दया आ गई, उसने नीचे जाकर उन पर अपने दुर्लभ, धवल, नरम, श्वेताभ्र, उष्ण पंख फैला दिए।
मूसलक परिवार बच गया।
सुबह हंस उड़ने को हुआ तो.... अरे यह क्या? उसके तो पंख कुतरे जा चुके थे !!🤔
हंस कातर भाव से रोने चिल्लाने😩😭 लगा... आस पास के पशु पक्षी 🕊️🐦🐇🐘🐒 एकत्र हुए। सारी बात सुनकर सभी उस मुसलक परिवार को धिक्कारने लगे।
चूहों ने कहा,🐀
"हमने कुछ भी गलत नहीं किया।
अपनी आइडेंटिटी के साथ जीना हमारा हक है। कुतरना हमारी आइडेंटिटी है, हमारी आइडेंटिटी की रक्षा होनी चाहिए। गलती हंस की है, हम तो जन्म जन्मांतर से यही कर रहे हैं।"
अब तुम्हारी ही समझ में नहीं आ रहा हो तो वे चूहे, क्या करें?
वे तो अपनी आदत से लाचार हैं !
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