मिट्टी वाला केक


साभार:- संदीप जोशी, जालौर
 ( संदीप जी जोशी के प्रत्यक्ष अनुभव की 16 जून की घटना है। संदीप जी मात्र सरकारी अध्यापक नहीं हैं, बच्चों के मनोविज्ञान को समझने वाले श्रेष्ठ अध्यापक एवं शिक्षा के क्षेत्र में अभिनव प्रयोग करने वाले यशवंतराव केलकर पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षक हैं )

आज का एक अनुभव जो गहरी प्रेरणा दे गया। जिंदगी जिंदादिली का नाम है ,यह केवल गीत मात्र नहीं है बल्कि जीवन की अनुभवजन्य  सच्चाई है। विभिन्न प्रकार की समस्याओं के कारण अथवा अपने जीवन में सुविधाओं की कमी का सदैव रोना रोने वाले संसार में,  ऐसे कुछ दृश्य अत्यंत प्रेरक होते हैं।

आज विद्यालय से फील्ड कार्य के लिए गांव में भ्रमण कर रहे थे। विद्यालय का खेल मैदान विद्यालय के भवन से  थोड़ा दूर है।  वहां अभी कुछ नए कमरों का निर्माण हुआ  है। इसलिए संभाल के लिए उधर भी चले गए। 

वहाँ जाकर देखा तो पाबूजी की फड़ का गायन करने वाला एक परिवार विद्यालय के खुले खेल मैदान में डेरा डाल कर बैठा था।  इनकी पूरी  घर गृहस्थी मोटरसाइकिल पर चलती है। विभिन्न गांव में प्रवास करते रहते हैं। कुछ दिन रुकते है। गली गली पाबूजी की फड़ का गायन करते है । फिर अगले गावँ की ओर बढ़ जाते है।

हम पहुंचे तब तक उस परिवार के दंपति गांव की ओर जा चुके थे। उनके छोटे बच्चे वहां खेल रहे थे। बच्चों से हल्की सी राम-राम करने के बाद हम दोनों शिक्षक मित्र अपने काम में और अपनी चर्चा में व्यस्त हो गए । बच्चों की तरफ ध्यान नहीं दिया।

 थोड़ी देर में कान में एक आवाज गूंजी जो उस परिवेश में मेरे लिए सर्वथा अप्रासंगिक थी,  अकल्पनीय, अविश्वसनीय  भी कह सकते हैं। मैंने साथी शिक्षक अनिल जी को ध्यान से कुछ सुनने का संकेत किया। 

हमने अपनी चर्चा रोकी तो आवाज एकदम स्पष्ट आने लगी।
आधुनिक परिवारों में जन्मदिन के अवसर पर केक काटते समय गाया जाने वाला गीत "हैप्पी बर्थडे टू यू"। वे  बच्चे अपनी टूटी फूटी आवाज में यह गीत गा रहे थे। हमें बड़ा आश्चर्य हुआ। हम उनकी ओर धीरे धीरे चल पड़े मोबाइल का कैमरा ऑन किया । 

एक अद्भुत दृश्य था जिसे देखकर आप बहुत आनंदित भी हो सकते हैं, अत्यंत भावविभोर भी हो सकते हैं, बहुत दुखी भी हो सकते हैं, कुछ क्षण तक लगातार देखते रहे तो आंखों से आंसू भी आ सकते है।

हाथ में छोटा सा चक्कू लेकर वे केक काटने का खेल कर रहे थे किंतु उनके सामने केक नहीं था एक बड़ी कटोरी में गीली मिट्टी भरकर उन्होंने उसे एक सपाट पत्थर पर उलट दिया था। एकदम केक की तरह लग रहा था और उन में से सबसे छोटा बच्चा बड़ी बहन की सहायता से चक्कू से उस मिट्टी के केक को काट रहा था और सभी मिलकर गा रहे थे हैप्पी बर्थडे टू यू ।

 हमने भी उनके साथ सुर में सुर मिलाया, पास जा बैठे और पूछा तो पता चला उन चार भाई बहनों में से सबसे छोटे वाले राकेश का जन्मदिन है। राकेश संभवत 3 वर्ष का बच्चा है। वहां उन मासूमो के पास दीपक या मोमबत्ती तो कहां से आती पर इसका भी विकल्प उनके पास था। बड़ी बहन पूनम ,लगभग 7-8 वर्ष की आयु,कहीं दूर किसी टाइल का टुकड़ा लाई थी जिसपर एक बड़े दीपक का चित्र था।बस यही सब उनका सेलिब्रेशन मेटेरियल था।

जेठ का महीना है, दिन में गर्मी तेज होती है  अतः माता-पिता जल्दी ही अपने परंपरागत कार्य की ओर चले गए और यह बच्चे अपने छोटे भाई का जन्मदिन मिट्टी का केक काट कर  आनंदित होकर समय व्यतीत कर रहे थे।

बच्चों का यह कार्य अंतर्मन को बहुत गहरे तक प्रेरित कर गया। जहां हम छोटी-छोटी बातों के लिए छोटी-छोटी असुविधाओं के लिए दुनिया से लेकर भगवान तक सबसे शिकायत करते रहते हैं, कोसते रहते हैं,  वही यह खुले आकाश तले एक मोटरसाइकिल पर आ जाए इतनी सी गृहस्थी लेकर गांव गांव गली गली प्रवास पर ही रहते हैं फिर भी हैप्पीनेस थेरेपी जानते है।

... और हाँ, खुश रहने की शिक्षा उन्होंने किसी विश्वविद्यालय से नहीं प्राप्त की, जीवन के संघर्षों से पाई है।

 हम दोनों शिक्षक मित्र भी उनके साथ बैठ गए। एक बच्ची को भेज कर  कुछ खाने पीने का सामान मंगवाया और उनके साथ बैठकर छुटकू राकेश का जन्मदिन मनाया। 
यह गांव छोटा है यहां केक तो मिलना संभव नहीं था। अतः जो तुरन्त उपलब्ध हो सकता था, वही मंगवा लिया। 
बच्चों से पूछने पर उनके पिताजी के झोले में  से एक साफा निकल गया।  छुटकू को साफा पहनाया। हम सब ने पुनः वैसा ही केक बनाकर गीत गाया। बच्चो के आनंद में हम भी जुड़ गए। 

पढ़ाई, कोरोना, टीकाकरण आदि कुछ बातें की।उन्हें उनकी सहज दुनिया मे खेलता , खिलखिलाता,मस्ती करता छोड़ कर हम भी अपनी राह चल पड़े।

गए तब तो खाली हाथ थे, पर जब लौट रहे तब एक बड़ी ज्ञान की बात सीख कर आ रहे थे। वह यह कि खुशी और आनंद के लिए चित्त की प्रवृत्ति सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उसका आर्थिक संपन्नता या और व्यापक भौतिक सुख-सुविधाओं से कोई संबंध नहीं। 

जिंदगी जिंदादिली का नाम है। 

भगवान ने यह जीवन कभी समाप्त नहीं होने वाली शिकायतों के लिए नहीं दिया है।जो प्राप्त हो उसी में आनंद के साथ जीते हुए आगे बढ़ने का, उन्नति करने का प्रयास करना चाहिए।

संदीप जोशी 
स्कूल डायरी.........
16 जून 2021

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